भारत की विकास गाथा पर विश्व बैंक की मुहर

इस ख़बर को शेयर करें:

मोदी सरकार के आर्थिक फ़ैसलों पर विश्व बैंक ने एक बार फिर से मुहर लगाई है. विश्व बैंक ने भारत के आर्थिक संकेतकों को बेहतर माना है और अमुमान लगाया है कि अगले साल भारत की जीडीपी 7.3 फीसदी होगी.

भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार पकड़ती तेज़ी पर एक और वैश्विक संस्था ने एक बार फिर से मुहर लगाई है. विश्व बैंक की भारत विकास रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के मजबूत संकेत देखे जा रहे हैं. औद्योगिक उत्पादन और विनिर्माण में खासी वृद्धि दर्ज की गई है. ये दो सेक्टर रोजगार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं, लिहाजा आने वाले दिनों में रोजगार के अवसरों में और ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है.

इस ख़बर की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि विमुद्रीकरण और जीएसटी सहित सरकार के बड़े आर्थिक सुधारों के बाद विकास की रफ्तार में कुछ ठहराव देखा गया था लेकिन ये रिपोर्ट इस बात का साफ संकेत देती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने जोरदार वापसी की है. विश्व बैंक की ये रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूत बुनियाद की ओर इशारा करती है.

विश्व बैंक की इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि मौजूदा साल में भारत की विकास दर 6.7 फ़ीसदी रहेगी, जबकि अगले साल जीडीपी बढ़कर 7.3 फ़ीसदी हो जाएगी, तो वहीं 2020 में भारत की विकास दर 7.5 फ़ीसदी होने का अनुमान है.

विश्व बैंक की इस रिपोर्ट में देश के महत्पूर्ण आर्थिक संकेतकों का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि विकास दर में धीमी वृद्धि हो रही है. साथ ही सेवा क्षेत्र को सबसे तेज़ी से बढ़ते सेक्टर के तौर पर बताया गया है. रिपोर्ट में देश के औद्योगिक विकास के तेज़ी के संकेतकों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है.

विश्व बैंक ने महंगाई पर काबू पाने के लिए भारत की तारीफ की है, तो वित्तीय अनुशासन बढ़ने से पारदर्शी व्यवस्था लागू होने का जिक्र किया है. रिपोर्ट में कर्ज और जीडीपी के अनुपात में कमी को रेखांकित किया गया है, तो बड़े आर्थिक पैमानों में स्थिरता की तारीफ की गई है.

विश्व बैंक ने आर्थिक सुधार के लिए उठाए गए कदमों से हुए फ़ायदे का भी जिक्र किया है, जिसके तहत ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बल मिला है तो एफडीआई के नियमों को उदार बनाने की सराहना की गई है. सरकार के द्वारा बुनियादी ढांचे में विकास को रफ्तार मिली है तो इंसोलवेन्सी और दिवालिया कानून जैसे सख्त निमय लागू किए गए हैं.

सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंच पा रहा है जिससे आम लोगों को ख़ासा फ़ायदा हुआ है. भारत में डिजिटलइजेशन के विस्तार पर ज़ोर है तो सरकारी सेवाओं और लाभ को जन-जन तक पहुंचाने के लिए देश में व्यवस्थाओं को मज़बूत किया गया है.

मुद्रास्फीति की दर में गिरावट के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आर्थिक गति प्रभावित हो सकती है. रिपोर्ट ने निर्यात के मोर्च पर विकास की रफ्तार को स्थिर माना है और इसका मानना है कि जीएसटी जैसे सुधारों के पूरी तरह से व्यवस्था में समाहित होने के साथ ही निर्यात की रफ्तार भी तेजी पकड़ सकती है.

भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और ग्लोबलइजेशन के इस दौर में दुनिया की आर्थिक गतिविधियों का असर भारत की जीडीपी पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है.

अब जब वैश्विक विकास दर में बढ़ोतरी का रुख देखा जा रहा है, इसके सकारात्मक प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने का अनुमान है. विश्व बैंक की इस रिपोर्ट से साफ हो गया है कि मोदी सरकार के आर्थिक सुधार का असर अब दुनिया भी मामने लगी है और सबसे तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्सवस्था का फायदा विश्व को भी मिलेगा.