दुनिया भर के मुल्कों ने केरल में पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए मदद की पेशकश की

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भीषण बाढ़ की त्रासदी झेल रहे केरल के लोगों की मदद के लिए देश और दुनिया भर से मदद के हाथ आगे आएं है। इस प्रलयंकारी बाढ़ को केंद्र ने गंभीर प्राकृतिक आपदा घोषित किया है..केन्द्र ने बाढ़ प्रभावित केरल के लिए छह सौ करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति ने केरल में बचाव और राहत कार्यों की समीक्षा के लिए बैठक की। बैठक में राज्य के ताज़ा हालात पर चर्चा की गई। वहीं, दुनिया भर के मुल्कों ने केरल में पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए मदद की पेशकश की है।

केरल में आई विनाशकारी बाढ़ को केंद्र सरकार की ओर से गंभीर प्राकृतिक आपदा घोषित किया जा चुका है और केंद्र राज्य को हरसंभव मदद मुहैया करा रही है। देश भर की कई राज्य सरकारों ने भी केरल के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। केन्‍द्र सरकार केरल में बाढ़ सहायता अभियान के लिए वस्‍तुओं के आयात और उसकी आपूर्ति पर सामान्‍य सीमा शुल्‍क और एकीकृत वस्‍तु और सेवा कर-आईजीएसटी में छूट दे रही है। वित्‍त मंत्री पीयूष गोयल ने एक ट्वीट संदेश में कहा इस संकट की घड़ी में देश केरल के साथ खड़ा है।

करों में छूट 31 दिसबंर 2018 तक वैध रहेगी। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने अपना एक महीने का वेतन प्रधानमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा की है। वो सभी सांसदों से भी ऐसा करने की अपील कर चुकी हैं। साथ ही उन्होंने सांसदों से सांसद विकास निधि से भी केरल बाढ़ पीड़ितों को मदद करने की अपील की है। वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि उद्योग जगत के लोग भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तत्पर हैं और उनका मंत्रालय इसके लिए हरसंभव सुविधा मुहैया करा रहा है।

केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए देशभर के युवा आगे आ रहे हैं। राष्ट्रीय सेवा योजना, एनएसएस, के तहत अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री इकट्ठा कर रहे हैं। दिल्ली के वेंकटेश्वर कॉलेज के छात्रों ने भी बाढ़ पीड़ितों के लिए कपड़े, खाद्य सामग्री और दवाईयां वगैरह इकट्ठा कर केरल के लिए रवाना किया।

इधर नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति की बैठक हुई जिसमें हालात की समीक्षा की गयी। इस बैठक में कई महत्त्वपूर्ण फ़ैसले लिए गए।

  • सरकार ने केंद्र द्वारा घोषित 600 करोड़ रु राज्य सरकार को भेज दिया है।
  • राज्य के अनुरोध पर 90 हज़ार मिट्रिक टन अतिरिक्त चावल की खेप मुहैया कराई गई है।
  • 94 फ़ीसदी टेलीकॉम टावर चालू हो गए हैं।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय 3 करोड़ क्लोरीन टैबलेट, 30 टन ब्लीचिंग पाउडर और पौने दो लाख सेनिटरी पैड केरल को भेज रहा है।
  • राज्य के सभी इलाक़ों में बिजली की आपूर्ति बहाल करने के लिए कार्य योजना तैयार की गई है।
  • राज्य को पर्याप्त संख्या में एलपीजी सिलिंडर और रेग्यूलेटर भी उपलब्ध कराया गया है।

बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों की आशंका के मद्देनज़र स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी पूरी तैयारी कर ली है। स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने उच्च अधिकारियों के साथ एक बैठक की। केंद्र की तरफ से केरल को दवाइयों की खेप भेजी जा रही है।

केरल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दुनिया से भी मदद के हाथ आगे बढ़ रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए 700 करोड़ रुपयों की सहायता राशि दी है। मालदीव ने भी 50 हज़ार अमेरिकी डॉलर की मदद दी है। थाइलैंड सरकार ने भी सभी तरह की मदद की पेशकश की है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केरल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हुई तबाही पर शोक जताया है।

केरल में भीषण बारिश और बाढ़ से बेहाल लोगों की सहायता के लिए देश भर से पहुंच रही राहत सामग्री के निशुल्क भंडारण के लिए कोचीन पोर्ट ट्रस्ट ने दो गोदाम निर्धारित किए हैं। पोर्ट ट्रस्ट के एक अधिकारी ने बताया कि राहत सामग्री ले कर पहला ट्रक तुतीकोरिन में वीओसी पोर्ट ट्रस्ट के माध्यम से रवाना किया गया । केरल में ईंधन की मांग को पूरा करने के लिए तटीय पोत स्वर्ण गोदावरी मुंबई से 50,000 मीट्रिक टन कच्चा ईंधन लेकर कोचीन पोर्ट की ओर रवाना हुआ है। देश के विभिन्न भागों से और राहत सामग्री तटीय पोत परिवहन के जरिए कोचीन पोर्ट पहुंचने लगी है।

केरल में राहत और पुनर्वास काम तेज़

केरल में बरसात के थमने और बाढ़ प्रभावित कुछ इलाकों में पानी घटने के बाद अब राहत और पुनर्वास का काम तेज हो चला है । मुख्यमंत्री पी विजयन ने कल बाढ़ को लेकर एक सर्वदलीय बैठक भी की जिसमें राहत और बचाव कार्यों पर चर्चा हुई । राज्य सरकार ने बाढ़ के हालात के मद्देनज़र विधानसभा के विशेष सत्र की राज्यपाल से अनुसंशा की है।

केरल में बरसात के थमने और बाढ़ प्रभावित कुछ इलाकों में पानी घटने के बाद अब राहत और पुनर्वास काम तेज हो गया है । बीते दो दिन से बरसात से कुछ राहत मिली है लेकिन बाढ़ प्रभावित एर्नाकुलम, त्रिशूर, पथनमथिट्टा, अलाफुझा और कोल्लम जिलों के कई इलाकों में पानी का स्तर कम नहीं हुआ है। हालांकि तमाम इलाकों में हालात सामान्य होने की ओर है । जलस्तर बढने से जिन बांधों से पानी छोड़ा जा रहा था वहां से पानी निकासी की मात्रा कम कर दी गयी है ।

आने वाले दिनों में बारिश न हुई तो हालात जल्द सामान्य हो सकते हैं । जिन इलाकों में पानी उतर गया है वहां साफ सफाई का काम हो रहा है । अधिकांश स्थानों पर रेल एवं सड़क यातायात बहाल हो गया है। थल सेना , नौसेना , वायुसेना, एनडीआरएफ , एसडीआरएफ , राज्य पुलिस समेत तमाम एजेंसियां राहत और बचाव कार्यों में लगी हैं ।केरल के 10 जिलों में इस समय एनडीआरएफ की 58 टीम अलग-अलग तरह से राहत और बचाव के काम में जुटी हुई है।

राज्य सरकार ने कहा है कि एक भी आदमी के फंसे होने तक अभियान जारी रहेगा । राज्य में मंगलवार को एक सर्वदलीय बैठक भी हुई जिसमें राहत और बचाव कार्यों पर चर्चा हुई । इस समय राज्य में साफ पानी और दवाओं की सबसे ज्यादा उपलब्धता कराने पर जोर दिया जा रहा है । एक ओर जहां दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है तो वहीं साफ पानी के लिए रेलवे विशेष ट्रेन चला रहा है । एक लाख लीटर पानी की क्षमता वाले 150 वाटर प्यूरीफायर पहुंचाए गए हैं । पानी घटने के बाद लोग अपने घरों का रुख करने लगे हैं। जहां-जहां पानी उतरा है वहां घरों में बिजली का सामान और फर्नीचर खराब हो चुका है। घर लौट रहे लोगों को रेडी टू ईट फूड और कपड़ों की जरूरत है। इसके अलावा इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर और कारपेंटर की भी जरूरत है।

पानी घटने के बाद 40 हजार पुलिस के जवानों को सफाई के काम में लगाया गया है । 3,200 से ज्यादा राहत शिविरों में 10 लाख से ज्यादा लोग शरण लिए हुए हैं। बाढ़ के चलते विस्थापित हुए लोगों में से 2 लाख 12 हजार महिलाएं और 12 साल की आयु के नीचे के एक लाख बच्चे शामिल हैं। फिलहाल राज्य में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में ईंधन आपूर्ति के इंतजाम किए जा रहे हैं। कई इलाकों में पेट्रोल पंपों ने भी काम करना शुरु कर दिया है । राहत पहुंचाने वाली एजेंसियां, कई राज्यों की सरकारें और देशभर के लोग राहत आपूर्ति कर रहे हैं । आईटीबीपी , सीआरपीएफ के साथ ही तमाम निजी संस्थाएं राहत कैंप चला रही है जहां रहने के साथ ही मेडिकल सुविधा दी जा रही है ।

केरल में आठ अगस्त को बाढ़ आने के बाद से करीब 223 लोग जान गंवा चुके हैं। सबसे ज्यादा जानें एर्नाकुलन , त्रिशूर और पत्तनमथेट्टा में गयी हैं । कई दशकों में आई यह सबसे भयंकर बाढ़ है जिसके कारण 20,000 करोड़ रूपए से अधिक का नुकसान हुआ है। बाढ के कारण 40 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन खराब हो चुकी है , सबसे ज्यादा मल्लपारुम में नुकसान हुआ है । राज्य सरकार के मुताबिक करीब 22000 घरों का नुकसान हुआ है । केंद्र सरकार कह चुकी है कि पीएम आवास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर ये घर बनाएं जाएंगे ।राज्य के सामने बेघर हुए लाखों लोगों का पुनर्वास और जलजनित बीमारियों को रोकने का काम एक बड़ी चुनौती बन गयी है। हालांकि अभी तक जलजलित बीमारियों के एक भी मामला सामने नहीं आए हैं । कुल मिलाकर फिलहाल लोगों का पुनर्वास बडा काम है जिससे निपटना बडी चुनौती है ।