विश्व मलेरिया दिवस आज

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विश्व मलेरिया दिवस मनाने का उद्देश्य इस गंभीर बीमारी के बारे में लोगों को जागरुक करना है ताकि इसके दुष्प्रभावों के बारे में अवगत कराया जा सके। इस साल मलेरिया दिवस के लिए थीम ‘रेडी टू बीट मलेरिया यानि मलेरिया को हराने के लिए तैयार रखा गया है। मलेरिया तेज बुखार वाली बीमारी है। यह संक्रमित मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर साफ पानी में अंडे देती है। इस रोग को फैलाने वाले परजीवी को प्लाज्मोडियम कहते है।

भारत में मुख्यतः दो प्रकार का मलेरिया पाया जाता है। प्लाजमोडियम फैल्सीफेरम एवं प्लाज्मोडियम वाईवेक्स। ये मच्छर जब मलेरिया से ग्रसित व्यक्ति को काटता है तब उसके खून में मौजूद प्लाज्मोडियम को अपने शरीर में खींच लेता है। लगभग आठ से दस दिन तक ये मच्छर मलेरिया फैलाने में सक्षम हो जाता है। यह परजीवी लार के साथ उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है। जिससे स्वास्थ्य व्यक्ति भी मलेरिया से ग्रसित हो जाता है।

ठंड के साथ बुखार आना, उल्टी होना, शरीर में ऐंठन एवं दर्द, चक्कर आना तथा थोड़ी देर में पसीने के साथ बुखार आना इत्यादि मलेरिया के लक्षण हैं। मलेरिया के लक्षणों का अनुभव होते ही तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें तथा रक्त जांच कराएं। रक्त जांच एवं मलेरिया रोधी दवा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य उपकेंद्रों, सहियाओं के पास मुफ्त में उपलब्ध है।

सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, अपने आसपास जलजमाव ना होने दें, शाम के समय पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़े पहनें। मलेरिया से आक्रांत गांवों में बचाव हेतु डीडीटी का छिड़काव किया जाता है। इसे अपने घरों के अंदर जरूर कराएं।